November 3, 2026
फरीदाबाद स्थित एसएसबी हार्ट एंड मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में 78 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय मरीज की पेट की मुख्य धमनी (एब्डॉमिनल एओर्टा) में बने गंभीर एन्यूरिज्म का उपचार एंडोवैस्कुलर तकनीक से किया गया।
मरीज को पेट में अत्यधिक दर्द था, जो पीठ तक फैल रहा था। अल्ट्रासाउंड जांच में पता चला कि पेट की मुख्य धमनी का व्यास लगभग 7 सेंटीमीटर तक बढ़ गया था, जबकि सामान्यतः इसका व्यास 3 सेंटीमीटर से अधिक नहीं होता। धमनी के फटने का खतरा होने के कारण CT एब्डॉमिनल एओर्टोग्राम जांच की गई।
इस मामले की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि धमनी का फूला हुआ हिस्सा दोनों किडनी को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों तक फैला हुआ था। इसके अतिरिक्त समस्या दोनों पैरों की ओर जाने वाली धमनियों तक भी पहुंच रही थी और रक्त वाहिकाओं में काफी घुमाव था।
डॉ. एस. एस. बंसल, सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट एवं CMD, के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने एंडोवैस्कुलर स्टेंट ग्राफ्ट तकनीक से उपचार किया।
इस प्रक्रिया में दोनों जांघों की धमनियों के रास्ते स्टेंट ग्राफ्ट डाला गया। किडनी की धमनियों की स्थिति के अनुसार ग्राफ्ट में विशेष छिद्र बनाए गए। इन छिद्रों के माध्यम से दो अलग-अलग कवर्ड स्टेंट लगाए गए, ताकि दोनों किडनी में रक्त का प्रवाह बना रहे।
इस तकनीक की सहायता से एओर्टिक एन्यूरिज्म का उपचार किया गया और दोनों किडनी को रक्त आपूर्ति सुरक्षित रखी गई। किडनी की धमनियों में स्टेंट लगाने के लिए बांह की धमनियों के रास्ते का भी उपयोग किया गया।
उपचार में शामिल मेडिकल टीम:
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